गूगल ने बना लिया क्‍वांटम प्रोसेेेेसर

By | November 7, 2019

गूगल ने ऐलान किया है कि कंपनी ने Quantum Supremacy हासिल कर ली है। कुछ समय पहले इंटरनेट पर इससे जुड़ा गूगल का पेपर लीक हुआ था तब से क्वॉन्टम सुपरमेसी खबरों में बना रहा है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने ट्वीट करके उत्साह जताया है।

गूगल ने पॉपुलर साइंटिफिक जर्नल Nature में एक नया आर्टिकल पब्लिश किया है। इसमें कंपनी ने बड़े दावे किए हैं और इससे कंप्यूटिंग पूरी तरह से बदल सकती है। दो दशक से इसपर काम किया जा रहा था और आखिरकार अब गूगल को इसमें सफलता मिली है। Quantum Supremacy से ट्रेडिशनल कंप्यूटिंग को पूरी तरह से बदला जा सकता है।

न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस के कंप्यूटर साइंटिस्ट को कोट किया गया है, जिन्होंने गूगल द्वारा जारी किए गए इस पेपर को रिव्यू किया है। उन्होंने कहा है, 1903 में जब Wright Brothers ने प्लेन फ्लाइट का आविष्कार किया था तब वो यूजफुल एयरप्लेन नहीं था, लेकिन इसे इसलिए डिजाइन किया गया था, ताकि प्वॉइंट को प्रूव किया जा सके और इसने प्वॉइंट को प्रूव किया।

कुल मिला कर बात ये है कि Quantum Supremacy भले अभी काम में न लाया जाए, लेकिन आने वाले समय में ये कंप्यूटिंग के तरीकों को बदल सकता है। इस तरह की कंप्यूटिंग का तरीका ट्रेडिशनल कंप्यूटिंग से काफी अलग है। ट्रेडिशनल कंप्यूटिंग में 0 और 1 का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन Quantum Supremacy से ये भी बदल दिया गया है।

गूगल का कहना है कि 54-qubit Sycamore प्रोसेसर ने वो कैलकुलेशन सिर्फ 200 सेकंड्स में कर दिया है जो ट्रेडिशनल और दुनिया के सबसे पावरफुल सुपर कंप्यूटर भी 10,000 साल में कर सकते हैं।

गूगल ने कहा है कि ये माइलस्टोन अचीव करने के लिए कंपनी ने कड़ी मेहनत की है और लगभग दो दशक के बाद ये सफलता मिली है। साइटिंस्ट इस पर 1980 से काम कर रहे थे।

IBM को गूगल पर शक है!

साफ शब्दों में कहें तो गूगल ने ये दावा किया है कि ट्रेडिशनल सुपर कंप्यूटर से ये काफी तेज है। अब जाहिर है इसकी सुपर कंप्यूटर से तुलना की जाएगी। IBM सुपर कंप्यूटर के मामले में काफी आगे है और आईबीएम ने गूगल के इस दावे को एक तरह से गलत ठहराने की कोशिश की है।

IBM ने कहा है कि गूगल ने जो दावा किया है कि खास तरह के इस कैलकुलेशन करने के लिए सुपर कंप्यूटर को 10000 साल लगेंगे, ऐसा नहीं है। क्योंकि सुपर कंप्यूटर इसी टास्क को सिर्फ 2।5 दिन में परफॉर्म कर सकते हैं।

सुंदर पिचाई ने एक ट्वीट में कहा है, ‘Quantum Computing भविष्य में क्या कर सकता है, उसे लेकर उत्साहित हूं। यह हमें एक नए लैंग्वेज बोलने का तरीका देता है, जिससे दुनिया को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा, सिर्फ 1 और 0 से नहीं, बल्कि इसके सभी स्टेट्स – सुंदर, जटिल और लिमिटलेस संभावनाओं के साथ।

साधारण कंप्यूटर और क्वांटम कंप्यूटर अलग कैसे हैं?

साधारण कंप्यूटर्स में इनफॉर्मेशन bits में स्टोर होते हैं। इन बिट्स का वैल्यू या तो 0 हो सकता है ये फिर 1। लेकिन quantum सिस्टम इससे अलग काम करता है। यहां ये बराबर होते हैं। यहां bit की जगह इनफॉर्मेशन quantum bit यानी qubit में स्टोर होते हैं और ये 0 या 1 एक साथ हो सकते हैं।

क्या है क्वांटम सुपरमेसी?

बस ये समझ लें कि Quantum Supermacy एक तरह की क्षमता है जो ऐसे प्रॉब्लम्स का हल निकाल सकती है जो ट्रेडिशनल कंप्यूटर के बस का नहीं है। कितनी भी जटिल समस्या क्यों न हो इसे क्वांटम सुपरमेसी के जरिए सॉल्व किया जा सकता है। क्वांटम कंप्यूटर्स देखने में डेस्कटॉप या लैपटॉप जैसे नहीं होते हैं। ये अलग-अलग पार्ट्स में होते हैं, जिन्हें सर्वर रूम में रखा जाता है।

आम कंप्यूटर्स किसी इनफॉर्मेंशन को 1 और 0 में प्रोसेस करते हैं इसे बिट्स कह सकते हैं। सुपर कंप्यूटर्स की बात करें तो ये एक सेकंट्स में कई हजार ट्रिलियन ऑपरेशन्स को अंजाम देते हैं जो आम कंप्यूटर की क्षमता से कहीं ज्यादा है। जहां तक Quantum Computer का सवाल है तो ये quantum bits पर काम करते हैं जिन्हें आप quibits भी कह सकते हैं।

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